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वर्ग कुंडलियाँ: अकेली लग्न कुंडली क्यों काफ़ी नहीं

एक ही कुंडली देखकर राय बनाना धोखा दे सकता है। जानिए वे पाँच वर्ग कुंडलियाँ जिन्हें अनुभवी ज्योतिषी कोई बड़ी बात कहने से पहले मिलाकर देखते हैं।

Pandit Arvind Sharma02 मार्च 202610 मिनट का पाठvarga, divisional, d9, d10

सिर्फ़ लग्न कुंडली (D1) देखकर राय बनाना ऐसा है जैसे कोई फ़िल्म एक मिनट में एक फ़्रेम की रफ़्तार से देखी जाए। कहानी का ढाँचा तो दिख जाएगा, पर हर बारीकी छूट जाएगी। हर वर्ग कुंडली — D2, D3, D9, D10, D12 — उसी कुंडली को एक अलग लेंस से देखना है, और हर लेंस जीवन के एक अलग हिस्से पर केंद्रित है।

वे पाँच वर्ग जो अनुभवी ज्योतिषी सचमुच देखते हैं

  • D1 — राशि कुंडली। बुनियाद। शरीर, समग्र भाग्य और जीवन के बड़े विषय।
  • D9 — नवांश। विवाह, धर्म और जीवन का उत्तरार्ध। हर ग्रह का असली बल यहीं आँका जाता है।
  • D10 — दशांश। नौकरी-कारोबार, समाज में भूमिका, उपलब्धि।
  • D12 — द्वादशांश। माता-पिता, कुल और पूर्वज।
  • D7 — सप्तांश। संतान से जुड़ी बातें, खासकर इसी वर्ग से देखी जाती हैं।

इन पाँचों को मिलाकर कैसे पढ़ें

किसी ग्रह को अपना फल देने के लिए एक नहीं, कई वर्गों में खरा उतरना पड़ता है। मंगल अगर D1 में उच्च का है पर नवांश में नीच का, तो वह मज़बूत मंगल नहीं है — वह ऐसा मंगल है जिसके पास बाहरी छवि का बल तो है, पर भीतरी टिकाव कम। सुर्खी नहीं, औसत पढ़िए।

जब कोई बड़ी बात तय करनी हो — विवाह, नौकरी का बदलाव, संतान — तो राय बनाने से पहले कम से कम तीन वर्ग मिलाकर देख लीजिए।

वर्गों की आपसी भाषा

  • वर्गोत्तम — जब ग्रह D1 और वर्ग कुंडली, दोनों में एक ही राशि में हो। इससे उसका बल कई गुना हो जाता है। वर्गोत्तम योगकारक ग्रह पूरे जीवन की दिशा तय कर सकता है।
  • पुष्कर भाग और पुष्कर नवांश — राशि के भीतर के कुछ खास अंश, जहाँ बैठा ग्रह वर्ग में मज़बूत और शुभ फल देता है। जब मुख्य पाठ दुविधा में हो, तब इन्हें ज़रूर देख लीजिए।

पाँच से आगे कब जाएँ

पढ़ाई और सीखने के लिए D24 (चतुर्विंशांश), जीवन की अड़चनें पहचानने के लिए D30 (त्रिंशांश), और पूर्वजन्म के कर्म के लिए D60 (षष्ट्यंश) — ये गहरे अध्ययन में काम आते हैं, रोज़मर्रा के सवालों में शायद ही कभी। पहले इन पाँच को साध लीजिए; बाकी अपने आप समझ में आने लगेंगे।

लेखक
Pandit Arvind Sharma

कर्मज्ञान के वरिष्ठ ज्योतिषी। चैट, कॉल और वीडियो — तीनों तरीकों से परामर्श उपलब्ध है।