लेख और मार्गदर्शिकाएँ
ज्योतिष की शास्त्रीय बातें, सीधी-सादी भाषा में। विषय चुनिए या जो खोजना है, लिख दीजिए।
नवांश (D9): वह कुंडली जो आपका धर्म दिखाती है
लग्न कुंडली के बाद हर अनुभवी ज्योतिषी सबसे पहले नवांश उठाता है। जानिए विवाह, जीवन के उत्तरार्ध और साधना के बारे में यह कुंडली क्या बताती है।
मंगल दोष: डर कितना, सच कितना
मंगल दोष है तो ज़रूर, पर जिन कुंडलियों पर मांगलिक की मुहर लगती है उनमें से ज़्यादातर में यह खुद ही कट जाता है। वे पाँच जाँचें यहाँ पढ़ लीजिए जो अनुभवी ज्योतिषी सचमुच करते हैं — अपनी कुंडली पर इन्हें लगाकर आप खुद देख सकेंगे कि बात कितनी है।
249 उपनक्षत्र: केपी पद्धति समय इतना सटीक कैसे बताती है
केपी में राशिचक्र 249 असमान हिस्सों में बँटता है और हर हिस्से का अपना स्वामी-क्रम होता है। यही वह तरीका है जिससे घटना का समय घंटों तक पकड़ में आता है।
सर्वतोभद्र चक्र: बाज़ार के संकेत पढ़ने की पुरानी जालीदार विधि
नौ गुणा नौ का एक चक्र, जिसमें नक्षत्र, अक्षर और दिक्पाल बैठते हैं। आर्थिक ज्योतिष में वेध की स्थिति से क्षेत्रवार रुझान देखा जाता है।
जैमिनी के आठ चर कारक: आपकी कुंडली का भीतरी परिवार
जैमिनी पद्धति में ग्रह अपने अंशों के हिसाब से आत्मा, मन, भाई, माता और संतान की भूमिकाएँ सँभालते हैं। जानिए इस भीतरी परिवार को पढ़ने का तरीका।
साढ़े साती: शनि के साढ़े सात साल असल में करते क्या हैं
साढ़े साती से जितना डर लगता है, उतनी ही गलतफ़हमी भी इसके बारे में है। तीनों चरणों का सीधा-सादा हिसाब और वे उपाय जो वक्त के साथ टिकते हैं।
मूलांक: आपकी जन्मतिथि में छिपा जीवन का नक्शा
जन्मतिथि से निकला एक अंक आपकी राह का खाका खींचता है। जानिए इसे निकालने का तरीका और 1 से 9 तथा मास्टर अंकों का अर्थ।
तीन पत्तों का टैरो: जब कोई फ़ैसला लेना हो
भूत-वर्तमान-भविष्य वाली बात पुरानी पड़ चुकी। असली काम का क्रम है — हालत, कदम, नतीजा। पाँच मिनट में इसे इस्तेमाल करना सीखिए।
आज का पंचांग एक मिनट में कैसे पढ़ें
तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — हर एक का मतलब क्या है, और नया काम शुरू करते समय इनमें से किन पर सचमुच ध्यान देना चाहिए।
विंशोत्तरी दशा: आपके जीवन की 120 साल लंबी समय-रेखा
वैदिक ज्योतिष में समय देखने की सबसे भरोसेमंद पद्धति यही है। जानिए 120 साल का यह चक्र महादशा से प्रत्यंतर्दशा तक कैसे खुलता है।
राहु और केतु: कर्म की छाया-रेखा
राहु-केतु ग्रह नहीं, चंद्रमा के पात हैं — फिर भी कुंडली को मंगल और बुध से ज़्यादा हिलाते हैं। जानिए ऐसा क्यों होता है।
अष्टकवर्ग: वह अंकतालिका जो आपकी कुंडली में पहले से मौजूद है
अष्टकवर्ग हर राशि को हर ग्रह से बिंदु देता है। जानिए सर्वाष्टकवर्ग की मदद से गोचर पढ़ने का सीधा तरीका।
महादशा बदलने पर क्या-क्या बदलता है
महादशा का बदलना अक्सर शनि की वापसी से भी बड़ा मोड़ होता है। जानिए पहले अठारह महीनों में किन बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए।
आरूढ़ पद: आप जो हैं, और दुनिया आपको जो समझती है
जैमिनी के आरूढ़ पद समाज में बनी आपकी छवि दिखाते हैं, जो अक्सर लग्न की सच्चाई से अलग होती है। जानिए इस फ़ासले को पढ़ना।
रत्न: शास्त्र असल में क्या कहते हैं
हर कमज़ोर ग्रह के लिए रत्न ज़रूरी नहीं होता। वह शास्त्रीय कसौटी यहाँ पढ़िए जिससे तय होता है कि रत्न कब पहनाया जाए और कब नहीं — इसे जान लेने के बाद आप सही सलाह पहचान लेंगे।
प्रश्न कुंडली: जन्म समय के बिना भी जवाब
जन्म का समय पता नहीं? प्रश्न कुंडली सवाल के क्षण से ही बन जाती है। जानिए केपी प्रश्न पद्धति हाँ या ना का जवाब कैसे देती है।
वर्ग कुंडलियाँ: अकेली लग्न कुंडली क्यों काफ़ी नहीं
एक ही कुंडली देखकर राय बनाना धोखा दे सकता है। जानिए वे पाँच वर्ग कुंडलियाँ जिन्हें अनुभवी ज्योतिषी कोई बड़ी बात कहने से पहले मिलाकर देखते हैं।
ग्रहण का असर: छह महीने पहले से छह महीने बाद तक
सूर्य और चंद्र ग्रहण का असर उसी दिन नहीं दिखता — असली कहानी उसके आगे-पीछे के छह-छह महीनों में चलती है। जानिए इसे पढ़ने का तरीका।
आज का चंद्र नक्षत्र और आपके दिन का मिज़ाज
चंद्रमा हर 27 घंटे में नक्षत्र बदलता है। मन का उतार-चढ़ाव अक्सर जन्म कुंडली के किसी ग्रह से नहीं, इसी छोटे-से गोचर से समझ आता है।
कालसर्प योग: डर, बढ़ा-चढ़ाकर कही बात, या सचमुच कुछ है
कालसर्प योग के बारह प्रकार होते हैं और उनमें से सिर्फ़ तीन सचमुच बाँधने वाले हैं। जानिए अपना प्रकार पहचानना और उसके लिए क्या करना है।