आज का पंचांग एक मिनट में कैसे पढ़ें
तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — हर एक का मतलब क्या है, और नया काम शुरू करते समय इनमें से किन पर सचमुच ध्यान देना चाहिए।
पंचांग यानी पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्रमा की चाल से निकलते हैं, और हर दिन का हिसाब इन्हीं से बनता है। छपता तो हर कैलेंडर में पूरा पंचांग है, पर देखना किसे है — यह कम लोग जानते हैं।
पाँचों अंग, एक मिनट में
- तिथि — चंद्रमा का दिन। शुक्ल पक्ष में 1 से 15, कृष्ण पक्ष में 1 से 15। इससे पता चलता है कि आज किस देवता का दिन है और दिन का समग्र मिज़ाज कैसा रहेगा।
- वार — हफ़्ते का दिन, और हर दिन का अपना ग्रह। रविवार सूर्य, सोमवार चंद्र, मंगलवार मंगल, बुधवार बुध, गुरुवार गुरु, शुक्रवार शुक्र, शनिवार शनि।
- नक्षत्र — चंद्रमा किस नक्षत्र में है, 27 में से एक। लगभग हर 24 घंटे में बदलता है। मुहूर्त देखने में सबसे ज़्यादा वज़न इसी का होता है।
- योग — सूर्य और चंद्रमा के बीच का कोण, 27 योगों में से एक। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योगों में नया काम शुरू करने से बचा जाता है — इनके बीत जाने के बाद का समय बेहतर रहता है।
- करण — आधी तिथि। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता भद्रा (विष्टि) करण पहचानने में है, जिसमें ज़्यादातर शुभ काम टाले जाते हैं; भद्रा उतर जाने के बाद वही काम निर्विघ्न बनता है।
अगर सिर्फ़ तीन चीज़ें देखनी हों
- नक्षत्र। जो काम शुरू कर रहे हैं, उसके लिए आज का नक्षत्र अनुकूल है या नहीं। पुष्य, हस्त और श्रवण — ये तीन लगभग हर काम के लिए अच्छे माने गए हैं।
- तिथि। नया काम शुरू करने के लिए रिक्ता तिथियाँ (किसी भी पक्ष की 4, 9, 14) छोड़ दीजिए, और यात्रा के लिए अमावस्या। इनके अलावा की तिथियाँ खुली हैं।
- राहुकाल। दिन का करीब डेढ़ घंटे का वह हिस्सा जिस पर राहु का अधिकार है। इस दौरान कागज़ पर दस्तख़त, ज़रूरी फ़ोन और नई शुरुआत टाल दीजिए — राहुकाल बीतते ही वही काम कर लीजिए।
जिन्हें रोज़ देखने की ज़रूरत नहीं
योग और करण का असली महत्व बड़े मुहूर्तों में है — विवाह, गृह प्रवेश, कोई शल्य क्रिया। पर यह तय करने के लिए कि ईमेल कब भेजें, इन्हें देखना ज़रूरत से ज़्यादा है। हर काम में मुहूर्त मत खोजिए; जो बड़ा है, उसी के लिए बैठिए।
ज्योतिष में बारीकी से ज़्यादा नियमितता काम आती है। रोज़ आधा मिनट पंचांग पर नज़र डालने की आदत तीन महीने में आपको उतना सिखा देगी, जितना पाँच सौ पन्नों की किताब एक हफ़्ते में नहीं सिखा पाती।
कर्मज्ञान के वरिष्ठ ज्योतिषी। चैट, कॉल और वीडियो — तीनों तरीकों से परामर्श उपलब्ध है।