सीधे मुख्य सामग्री पर जाएँ
सभी लेख
टैरो

तीन पत्तों का टैरो: जब कोई फ़ैसला लेना हो

भूत-वर्तमान-भविष्य वाली बात पुरानी पड़ चुकी। असली काम का क्रम है — हालत, कदम, नतीजा। पाँच मिनट में इसे इस्तेमाल करना सीखिए।

Devika Sen01 अप्रैल 20265 मिनट का पाठtarot, decision

टैरो की बदनामी की एक बड़ी वजह है — ज़रूरत से ज़्यादा जटिल बिछावटें। रोज़ के ज़्यादातर सवालों के लिए तीन पत्ते काफ़ी हैं। असली कारीगरी तीन पत्तों में नहीं, उन तीन नामों में है जो आप उन्हें देते हैं।

भूत-वर्तमान-भविष्य से बेहतर

'भूत, वर्तमान, भविष्य' वाली बिछावट सुनने में सुंदर लगती है, पर काम की सबसे कम है। बीता हुआ बदला नहीं जा सकता, आने वाला अभी अनुमान भर है — हाथ में सिर्फ़ आज है, और कदम आज ही उठाना है।

इसके बजाय यह क्रम आज़माइए: हालत — कदम — नतीजा।

  • पहला पत्ता — हालत। असल में चल क्या रहा है, उस कहानी के नीचे जो आप खुद से कहते आ रहे हैं।
  • दूसरा पत्ता — कदम। इस वक्त आपके हाथ में जो चाल है।
  • तीसरा पत्ता — नतीजा। वह कदम अगर पूरे मन से उठाया जाए, तो आगे क्या बनता है।

पाँच मिनट में साफ़ पाठ कैसे करें

  • सवाल ठोस बनाइए। 'यह प्रस्ताव लूँ या नहीं' — यह 'मेरा करियर कैसा रहेगा' से कहीं बेहतर सवाल है।
  • पत्ते तब तक फेंटिए जब तक मन खुद न रुक जाए। एक बार गड्डी काटिए, फिर ऊपर के तीन पत्ते उठाइए।
  • पहले हर पत्ते को अकेले पढ़िए — पूरा, बिना आगे झाँके।
  • फिर तीनों को एक वाक्य की तरह पढ़िए। बीच वाला पत्ता उस वाक्य की क्रिया है।

टैरो कहाँ काम नहीं आता

जिन बातों पर आपका कोई ज़ोर नहीं — चुनाव का नतीजा, किसी और का फ़ैसला, मौसम — उन्हें बताने में टैरो कमज़ोर है। इसकी असली ताकत तब खुलती है जब मन धुंध में हो और यह तय करना हो कि अगला कदम अपना क्या हो।

कोई पत्ता मन को चुभे तो उसके साथ थोड़ी देर बैठिए। मीनार, महापरिवर्तन, तलवार का तिक्का — ये पत्ते इसलिए बेचैन करते हैं क्योंकि ये उस बात का नाम ले लेते हैं जिससे आप कतरा रहे थे। पत्ते ने वह बात पैदा नहीं की; उसने बस कमरे की बत्ती जला दी। जो दिख गया, अब उस पर एक छोटा कदम उठा लीजिए।

लेखक
Devika Sen

कर्मज्ञान के वरिष्ठ ज्योतिषी। चैट, कॉल और वीडियो — तीनों तरीकों से परामर्श उपलब्ध है।